बात ऑस्ट्रेलिया की है... 

दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान परिषद (NHMRC - नेशनल हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च काउंसिल) ने वर्ष 2015 में होमियोपैथी के वैज्ञानिक पहलु को खोजने के लिए एक समिति का गठन किया जिसका कार्य था अपने शोध और अध्ययनों के आधार पर होमियोपैथी के वैज्ञानिक पहलु पर अपनी एक रिपोर्ट सौंपना, जिसके बल पर होमियोपैथी के लिए आगे की नीतियों को निर्धारित किया जा सके। उसी के तहत मार्च 2015 में, होमियोपैथी पर एक सूचना पत्र प्रकाशित किया गया था, जो होमियोपैथी पर हुए उन शोध और अध्ययनों की एक अनुमानित समीक्षा थी और जिसे आमतौर पर ' द ऑस्ट्रेलियन रिपोर्ट ' कहा गया था। इस रिपोर्ट का निष्कर्ष यह था कि: " ...ऐसी कोई स्वास्थ्य स्थिति नहीं है जिसके लिए विश्वसनीय प्रमाण हो कि होमियोपैथी प्रभावी है। "


इस रिपोर्ट के बाद से ऑस्ट्रेलिया में होमियोपैथी की प्रैक्टिस पर बहुत से प्रतिबन्ध लाद दिए गए। यह सब निर्णय NHMRC की उस झूठी रिपोर्ट के आधार पर लिया गया जिसे झूठा साबित करने में लगभग एक दशक का समय लग गया। FOI (Freedom of Information) के माध्यम से आखिरकार सच बाहर आ सका कि यह सब दरअसल एक घिनोने षड्यंत्र के कारण हुआ था। इन तथ्यों का खुलासा इसीलिए हो सका क्योंकि जैसे भारत में "राइट टू इनफार्मेशन एक्ट (RTI)" है उसी प्रकार ऑस्ट्रेलिया में सूचना की स्वतंत्रता (FOI) है जिसके माध्यम से समीक्षाओं के मूल पेपर प्राप्त किये गए और सच निकलकर आ सका।


जिस प्रकार क़ानून का एक अच्छा जानकार वकील, कानून को तोड़-मरोड़कर अपने पक्ष में करने का हर पैंतरा जानता है, ठीक उसी प्रकार बिकाऊ वैज्ञानिकों के एक समूह ने भी यही किया। उन्होंने पूरी रिसर्च को एक पूर्व निर्धारित निष्कर्ष की तरफ मोड़ दिया और स्वयं को एक निष्पक्ष जांचकर्ता के रूप में प्रस्तुत करने का असफल प्रयास किया। किन्तु वे यह भूल गए कि 'सच को प्रताड़ित किया जा सकता है पराजित नहीं।'


NHMRC के दुराचार की सूची कुछ इस प्रकार है:

• स्वयं NHMRC के दिशानिर्देशों में यह कहा गया है कि ऐसी समितियों में समीक्षा किए जा रहे विषय के विशेषज्ञ शामिल होने चाहिए, फिर भी इस समिति में एक भी होमियोपैथी का विशेषज्ञ शामिल नहीं किया गया था...क्यों?

• जब एक मूल समीक्षा होमियोपैथी के पक्ष में पाई गई, तो NHMRC ने उस समीक्षा को छिपा दिया और दूसरी समीक्षा की। इसके बाद उसने उस समीक्षा के हर पहलू को गढ़ा, ताकि यह गलत निष्कर्ष निकाला जा सके कि होमियोपैथी प्रभावी नहीं थी। 

• बाद में, NHMRC ने कहा कि उन्होंने पहली रिपोर्ट को खारिज कर दिया क्योंकि यह खराब गुणवत्ता वाली थी, बावजूद इसके कि यह एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और NHMRC के स्वयं के दिशानिर्देशों के लेखक द्वारा की गई थी। यह NHMRC के वही वैज्ञानिक थे जिन्होंने साक्ष्य समीक्षा कैसे की जाए के दिशानिर्देशों को गठित किया था।  

• यहाँ तक कि समीक्षा प्रक्रिया की देखरेख करने वाली विशेषज्ञ समिति के एक सदस्य, प्रोफेसर फ्रेड मेंडेलसन ने भी पहली समीक्षा की उच्च गुणवत्ता की पुष्टि करते हुए कहा- "मैं इस मूल्यांकन के लिए दी गई कठोरता, संपूर्णता और व्यवस्थित दृष्टिकोण से प्रभावित हूं।"

• NHMRC ने कहा कि 2015 में प्रकाशित दूसरी रिपोर्ट के नतीजे "1800 से अधिक अध्ययनों के कठोर मूल्यांकन" पर आधारित थे, जबकि FOI के द्वारा यह तथ्य निकला कि वास्तव में, उन्होंने होमियोपैथी पर सभी सकारात्मक अध्ययनों को छोड़ दिया था और केवल 5 नकारात्मक अध्ययनों का उपयोग किया था।

• NHMRC ने एक ऐसी पद्धति का उपयोग किया जिसका उपयोग पहले या बाद में किसी अन्य समीक्षा में कभी नहीं किया गया। उन्होंने निर्णय लिया कि परीक्षणों को 'विश्वसनीय' बनाने के लिए कम से कम 150 प्रतिभागी होने चाहिए। यह इस तथ्य के बावजूद है कि NHMRC स्वयं नियमित रूप से 150 से कम प्रतिभागियों के साथ अध्ययन आयोजित करता रहा है। (संभवतः वे जानते थे कि होमियोपैथी individualization की अवधारणा पर आधारित है ना कि generalization पर, इसीलिए जितने ज़्यादा प्रतिभागी होंगे होमियोपैथी के लिए चुनौती उतनी ही बड़ी होगी)


• NHMRC समिति के अध्यक्ष, जिन्होंने 2015 में यह फर्जी समीक्षा गढ़ी थी, ने होमियोपैथी विरोधी लॉबी समूह का सदस्य होने के बावजूद, हितों के टकराव के फॉर्म पर हस्ताक्षर किए। (यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि समिति के सभी सदस्य निष्पक्ष हों)

ऐसा देखा गया कि जिन लोगों ने यह समीक्षा की, वे शुरू से ही होमियोपैथी के खिलाफ थे और होमियोपैथी की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से उन्होंने नतीजों में हेरफेर करने के लिए हर संभव प्रयास किया। यह उच्चतम स्तर पर वैज्ञानिक दुर्भावना नहीं तो और क्या है?


लोकपाल 

इस सबके जवाब में, ऑस्ट्रेलियन होमियोपैथिक एसोसिएशन (Australian Homeopathic Association (AHA)) ने अगस्त 2016 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान परिषद (NHMRC) के खिलाफ राष्ट्रमंडल लोकपाल को एक औपचारिक शिकायत की।


इस औपचारिक शिकायत, जिसकी जांच पी.आई.डी. ​​(PID - Whistle-blower Act) के तहत की जानी थी, का उद्देश्य NHMRC को, होमियोपैथी पर अपनी  2015 की फर्जी रिपोर्ट में पूर्वाग्रह, कदाचार और अंततः जनता को गुमराह करने के लिए, जिम्मेदार ठहराना था।


यह भ्रामक रिपोर्ट दुनिया-भर में फैल गई और होमियोपैथी के आलोचकों द्वारा व्यापक रूप से उल्लिखित और वर्णित की गई (और अभी भी की जाती है)। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसका उपयोग उन तर्कों में किया गया था जिसके कारण होमियोपैथिक अस्पतालों की फंडिंग खत्म हो गई और यू.के., फ्रांस और अब जर्मनी की राष्ट्रीय स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों से होमियोपैथी को हटा दिया गया। इस फर्जी रिपोर्ट ने कनाडा, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में सरकारों को होमियोपैथी को सीमित करने वाले कानून पारित करने के लिए प्रेरित किया।


इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण था कि ऑस्ट्रेलियाई लोकपाल निष्पक्ष जांच करें और फिर उस रिपोर्ट को सार्वजनिक रूप से निरस्त  करें। ऑस्ट्रेलियाई होमियोपैथिक एसोसिएशन (AHA) के अध्यक्ष गैरी डेंड्रिनो (Gerry Dendrinos) ने होमियोपैथी अनुसंधान संस्थान (HRI - Homeopathy Research Institute) के साथ मिलकर NHMRC के कदाचार के बारे में सभी तथ्य एकत्र किए और इसे लोकपाल को सौंप दिया।


किन्तु लोकपाल ने एक भी शब्द कहे बिना सात साल बिता दिए। अंततः, 4 अगस्त 2023 को, लोकपाल ने जांच बंद कर दी और यह बयान जारी किया: "हमारे सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद, इस विषय पर हमारे कार्यालय को स्वतंत्र सलाह प्रदान करने के लिए किसी विशेषज्ञ (या विशेषज्ञों) को शामिल करना संभव नहीं था। स्वतंत्र, विशेषज्ञ वैज्ञानिक विशेषज्ञता के अभाव में हम वैज्ञानिक पद्धति के उन मामलों को निर्णायक रूप से निर्धारित करने में सक्षम नहीं हैं। "


सही है... इन सात वर्षों में लोकपाल एक ऐसे वैज्ञानिक को खोजने में असमर्थ रहे जो वस्तुनिष्ठ अनुसंधान (ऑब्जेक्टिव रिसर्च) करने के बुनियादी नियमों को समझता हो..!!!


होमियोपैथी के खिलाफ दुनिया-भर में दुष्प्रचार अभियान चलाए जा रहे हैं। उनके बाद होमियोपैथी के अभ्यास और औषधियों की बिक्री को प्रतिबंध लगाने वाले कानून लागू होते हैं। यह सब भ्रष्टाचार और रिश्वत का नतीजा है। आप इसमें शामिल व्यक्तियों को आसानी से पहचान सकते हैं। किसी भी देश में जो मंत्री सबसे पहले उस कानून को पेश करता है, वही पैसा लेता है। 


यह बिल्कुल स्पष्ट है कि होमियोपैथी बड़े-बड़े दवा उद्योगों तथा भ्रष्ट और बिकाऊ एलोपैथिक चिकित्सकों दोनों के लिए खतरा है। हमें आभारी होना चाहिए उन ईमानदार और मेहनती वैज्ञानिकों का जिनके सच के कारण लुटेरी फार्मास्यूटिकल कम्पनीज, बिकाऊ चिकित्सक और भ्रष्ट नेताओं का घिनोना चेहरा सामने आ सका। विडम्बना ही है कि होमियोपैथी पर आक्रमण करो और मुँहमाँगा पैसा पाओ।




Note: The article has been translated from the original article written by Dr Alan V. Schmukler  https://hpathy.com/editorials/attacks-on-homeopathy-follow-the-money/